यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते – रमन्ते तत्र देवता।
जहाँ नारी की पूजा होती है, वहाँ देवताओं का वास होता है – ये बचपन से सुनते आ रहे हैं। आपने भी सुना होगा। अब इसकी उलटबांसी पर गौर कीजिए ! जहाँ बेटियों के साथ दुराचार होता है, नारी शक्ति के साथ अन्याय, अत्याचार, शोषण होता है – वहाँ किसका वास होता है? इसके राज में, जिसके संरक्षण में बार-बार महिला सुरक्षा और सम्मान की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं, वो खुद कौन होता है?
साल में 2 बार मौ दिन, माँ दुर्गा और उनके नौ रूपों की उपासना होती है। अष्टमी / नवमी के दिन छोटी बच्चियों को माँ जगदम्बा का रूप मानकर उनका पूजन होता है, कन्या जिमाई जाती है, भोजन कराया जाता है, पैर धोए जाते हैं – अभी से 3 दिन पहले भी हम सब ने कन्या पूजन किया। मैंने भी किया और कन्या पूजन करते हुए मैंने अंकिता भंडारी को याद किया। 19 साल की भारत माता की उस बच्ची को याद किया जिसने अपनी गरिमा, अपनी अस्मिता के सौदा करने के बजाय अपनी जान देना वाजिब समझा।
और फिर मैंने याद किया 2014 का वो नारा, जिसकी बदौलत झूठ, फरेब और मक्कारी से आधी आबादी का विश्वास जीत कर नरेंद्र मोदी सत्ता की कुर्सी पर काबिज हुए – बहुत हुआ नारी पर वार…
– बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ।
ये नारे आज इतने झूठे और खोखले साबित हो गए हैं कि जनता कह रही है – ‘भाजपा से बेटी बचाओ’, ‘बचेंगी बेटियाँ – तभी तो पढ़ेंगी बेटियाँ’।
कुलदीप सेंगर से लेकर, बृजभूषण शरण सिंह और दुष्यंत गौतम तक; हाथरस से, उन्नाव से लेकर उत्तराखंड तक, पहलवान बेटियों से लेकर अंकिता भंडारी तक – बलात्कारियों, यौन उत्पीड़न करने वालों, आरोपियों, संदेहास्पद भूमिका वालों का बचाव मोदी सरकार ने, भाजपा सरकारों ने पूरे देश में किया। आज धामी सरकार भी इसी पृष्ठभूमि में कठघरे में खड़ी है।
अंकिता भंडारी के माता-पिता 4 साल से एक ही सवाल पूछ रहे हैं – ‘वो VIP कौन था?’ जब फरवरी 2026 में खुद CBI ने ‘अज्ञात VIP’ के खिलाफ केस दर्ज किया है – जब अभियोजन का अपना केस ये कहता है कि अंकिता की हत्या इसलिए हुई क्योंकि उसने एक ‘VIP’ मेहमान को ‘स्पेशल सर्विस’, देहों से इनकार कर दिया था। जब अंकिता के WhatsApp chat से भी ‘VIP’ को ‘Extra Service’ देने के दबाव की बात सामने आई है, तो क्या VIP का नाम और पहचान, CBI enquiry से बाहर निकल कर – देश और उत्तराखंड के लोगों के सामने, अंकिता के माता-पिता के सामने नहीं आना चाहिए? क्या बिना VIP की पहचान के अंकिता को न्याय मिल सकता है?
इसी से जुड़ा दूसरा बड़ा सवाल – कि जब उर्मिला सनावर ने एक video clip के माध्यम से दावा किया कि पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने दुष्यंत गौतम को ‘VIP’ बताया है।
जब संदेह की सुई दुष्यंत गौतम की ओर इशारा कर रही है, तो ऐसी परिस्थितियों में मोदी सरकार की सलाह पर दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बना कर किसी भी तरह की जाँच से immunity देना सही है? CBI enquiry पूरी होने तक क्या दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाया जाना चाहिए था?
राज्यपाल को संवैधानिक immunity होती है। न्यायपालिका, CBI या SIT उससे पूछताछ नहीं कर सकती।राज्यपाल बनाने के लिए गृह मंत्रालय और BJP ने दुष्यंत गौतम को चुपचाप clean chit दे दी। 19 Oct को शपथ दिला दी। ऐसा क्यों किया, यही सवाल अंकिता के माता-पिता राष्ट्रपति से पूछना चाहते हैं।
क्या कोई दुखती नब्ज है जो दुष्यंत गौतम ने दबाई हुई है?
आखिर दुष्यंत गौतम के पास ऐसा क्या राज है कि न सिर्फ CBI जाँच रुकी हुई है, बल्कि राज्यपाल बना कर जाँच के दायरे से बाहर कर दिया गया? बेटियों की बजाए आरोपियों को संरक्षण क्यों ? उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और देवभूमि की बेटी के सम्मान पर प्रहार क्यों ?
और यहाँ मैं दो बातें और स्पष्ट कर देती हूँ—
ये सवाल कांग्रेस ने और उत्तराखंड की जनता ने पूछने तब शुरू किए जब ये सारे तथ्य भाजपा नेताओं के बीच से निकलने शुरू हुए। पुलिस ने तो VIP के नाम उजागर नहीं किए। लेकिन जब BJP के अपने नेताओं ने पिछले साल दुष्यंत गौतम का नाम उजागर किया, तो पूरा उत्तराखंड सड़कों पर उतर आया। इसलिए उत्तराखंड में रोष है।
इसलिए उसके माता-पिता आक्रोशित हैं। और अगर ये दावा है कि AI Generated audio clip है, तो इसकी जाँच की पुष्टि नहीं होनी चाहिए क्या ? Forensic जाँच audio clip की नहीं होनी चाहिए क्या ? दूध का दूध / पानी का पानी नहीं होना चाहिए क्या ? किस बात का डर है मोदी सरकार को ? किस बात का डर है धामी सरकार को ?
फिर से उसी सवाल…
