बिहार की सियासत में सत्ता हस्तांतरण का ‘खेल’ शुरू हो गया है. लगभग 21 साल तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने पटना से लेकर दिल्ली तक के गलियारों में हलचल तेज कर दी है. यह केवल एक मुख्यमंत्री का चेहरा बदलना भर नहीं है, बल्कि बिहार के सत्ता समीकरणों का पूरी तरह से कायाकल्प होगा. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बिहार की राजनीति में अब ‘पोस्ट-नीतीश’ युग की पटकथा लिखी जा रही है.
बिहार के सियासी ड्रामे का क्लाइमेक्स 10 अप्रैल के आसपास देखने को मिल सकता है. दरअसल, वर्तमान राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद ही नव निर्वाचित सदस्य शपथ ग्रहण लेंगे. इसलिए, नीतीश कुमार 10 अप्रैल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहेंगे, ऐसा कयास लगाये जा रहे हैं. हालांकि, अगले मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन शुरू हो गया है. सूत्रों का कहना है कि अगले महीने से पहले किसी बड़े फैसले की उम्मीद कम ही है.
सियासी गलियारों में चर्चा थी कि नीतीश कुमार दिल्ली जाकर केंद्रीय कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, लेकिन फिलहाल ऐसी संभावना नहीं है. इस बीच नीतीश के करीबियों ने संकेत दिया है कि उनका आधार पटना ही रहेगा. वे केवल संसद सत्र के दौरान ही दिल्ली जाएंगे, यानी वे बिहार की राजनीति पर अपनी नजर बनाये रखेंगे.
नीतीश के हटने की घोषणा के बाद बिहार में बीजेपी ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आ रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद बीजेपी के खाते में जाना तय माना जा रहा है. सत्ता के इस नए समीकरण में बीजेपी और जेडीयू को 15-15 मंत्री पद मिल सकते हैं. साथ ही गठबंधन के अन्य साथियों को साधने के लिए एलजेपी (रामविलास) को 2, आरएलएम को 1 और हम (HAM) को 1 कैबिनेट पद देने की तैयारी है.
इस पूरे ड्रामे का सबसे चौंकाने वाला ट्विस्ट नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की एंट्री है. चर्चा जोरों पर है कि निशांत को जल्द ही जेडीयू में औपचारिक पद दिया जाएगा. एक चर्चा यह भी है कि निशांत कुमार को उप-मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो जेडीयू की ओर से डिप्टी सीएम का केवल एक ही पद फाइनल होगा. जानकारों के अनुसार, यह कदम जेडीयू के भीतर भविष्य के नेतृत्व को सुरक्षित करने की रणनीति मानी जा रही है.
जहां एनडीए खेमे में ‘अवसरों के नए द्वार’ खुलने की बात हो रही है, वहीं विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है. आरजेडी ने इसे “जनादेश की खुली धोखाधड़ी” करार दिया है. विपक्षी दलों का आरोप है कि नीतीश कुमार अपनी जवाबदेही से भागकर दिल्ली सुरक्षित रास्ता ढूंढ रहे हैं और बिहार की जनता के वोट का अपमान कर रहे हैं.